Suraj ki roshni सूरज की रोशनी

कौन आया यह छत पर?
सुबह-सवेरे चढ़ कर.....


हर खिड़की से,
दरवाजों से...
हर कोनों में घर पर....
निकले बाहर तो नहला कर,
चढ़ जाए यह सर पर...


कौन आया यह छत पर?
सुबह-सवेरे चढ़ कर.....


पत्तों-पत्तों पर तिनकों पर,
चमक हजारों लेकर....
ढेरों-ढेरों लच्छो वाली,
किरनें बादल से छनकर...


कौन आया यह छत पर?
सुबह-सवेरे चढ़ कर.....


गमलों से जो लपक-लपक ही,
झांक ओसार आ जाए..
ताजी़ सी एक स्वाद जगाए
चाय की प्याली में घुलकर...


कौन आया यह छत पर?
सुबह-सवेरे चढ़ कर.....


नदी-पोखरे, गेंदे - मोगरे,
राहों और गलियारे..
रच-बस कर प्रत्येक में ही यह,
हक जतलाए सब पर...


कौन आया यह छत पर?
सुबह-सवेरे चढ़ कर..


छज्जो के कोरो पर पर बैठे,
क्या महल‌ क्या छप्पर..
एक समान सब रोशन करदे,
वह जो बैठा है उपर..
नाम अनेक से जिसे पुकारें,
कह लो सूरज या दिनकर... 

कौन आया यह छत पर?
सुबह-सवेरे चढ़ कर..

                    

                             खुशिहाली✍️

            

   

                         









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