संदेश

वर्तमान का मोल

Kosh✍️ वर्तमान का मोल --------------------- हिय भरमाया, चित्त बौराया,, देख जि़ल्द अब काया... अद्य अनागत निधि खनन में, वर्तमान जहड़ाया... हिय भरमाया......चित्त बौराया.... अभिलाषा प्रतियोगी नभ में, सुधि आवन भई गई अबेर... जन - जन लगी कतार बड़ी थी, अति विलंब मम बेर... गागर भर सागर सर ढारा, चिंता चाह मोह की ज्वाला.. इंह-उंह भागत पांव नग्न ही, उपापोह न बुझी अग्न ही... आप हि आप मनन बतियाऊं, छला स्वयं ही ‌साया......... हिय भरमाया......चित्त बौराया........ देख जि़ल्द अब काया... प्रबल इच्छा की समीक्षा, लोभ-लाभ न छोड़ी पीछा.. रेत सा क्षण-क्षण जाय फिसलता, भीतर ही मन खाए नोच.. भरम की निद्रा टूटन लागी, छंटी अकारण सोच... सुख लालसा उमर गंवाई, ढांचा मात्र अब वृद्ध समाया... मृगतृष्णा ही जोहत-जोहत, मुट्ठी कुछ न आया.... हिय भरमाया......चित्त बौराया..... देख जि़ल्द अब काया................            रचनाकार - (खुशिहाली) ------------------------------ ------------------------------ - शब्दार्थ -  अद्य =  आज              अनागत =  ‌...

Disha aur dasha

 Marne k lye insan 1 mushkil me wajah dhoond leta h kyu? Jbke Jeene ke lye 1000 Khoobsurat  bahane hote hain....                                   Khushihali ✍️                             

Nature 3 प्रकृति ३📷

चित्र
Kosh📷

Hindi✍️ हिंन्दी

चित्र
हां मैं हिंदीभाषी हूं, मन हृदय से इसकी दासी हूं.. मुझे शर्म नहीं कहने में यह, क्योंकि की मैं भारतवासी हूं... हां मैं हिंदीभाषी हूं, हां मैं हिंदीभाषी हूं....                                  खुशिहाली✍️         

Nature2 प्रकृति २

चित्र
📷खुशिहाली

Nature प्रकृति

चित्र
Nature प्रकृति

Sundar bachpan

चित्र